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Hareli Festival Of Chhattisgarh

Hareli Festival Of Chhattisgarh

Hindi Me Jano Sab Kuch




Hareli Festival Of Chhattisgarh


दोस्तों आज हरेली का त्योहार है। आप सभी पाठकों को हमारे छत्तीसगढ के प्रथम त्योहार हरेली की बहुत बहुत शुभकामनाएं ।

        आज के इस लेख मे आप को मिलेंगी हरेली से संबंधित ज़यादा से ज़्यादा जानकारियाॅ इस ब्लाग Hindi Me Jano Sab Kuch मे।

चूंकि हरेली त्योहार छत्तीसगढ का पहला और खास त्योहार है इसलिए सबसे पहले बात करते हैं हमारे छत्तीसगढ की।


छत्तीसगढ़ राज्य 


छत्तीसगढ राज्य की स्थापना 1st November 2000 को हुई थी। 52198 स्कवेयर मीटर मे फैला यह राज्य भारत के मध्य-पूर्व मे स्थित है। धन धान्य और खनिज संपदा से लबालब यह राज्य जनसंख्या के मामले मे भारत का सोलहवां राज्य है। Electricity और Steel और धान का यहां सर्वाधिक उत्पादन होता है। इसलिए इसे धान का कटोरा भी कहते हैं। 



छत्तीसगढ़ राज्य के लोक नृत्य एवं त्यौहार 


यहां के खास लोक नृत्यों मे प्रमुख रूप से पंडवानी, राऊत नाचा, सुआ और करमा फ़ेमस हैं। और छत्तीसगढ के प्रमुख त्योहार हरेली, तीज, बस्तर दशहरा, बस्तर लोकोत्सव, राजिम कुंभ और मड़ई हैं। जिसमे बस्तर दशहरा, राजिम कुंभ और नारायणपुर मड़ई काफ़ी प्रसिद्ध हैं।


Hareli Festival


        वैसे तो सभी त्योहार छत्तीसगढ मे मनाए जाते हैं। पर हरेली त्योहार का खास महत्व है। क्योंकि छत्तीसगढ का पहला त्योहार हरेली है। सभी त्योहारों की शूरूआत इसी से होती है। हरेली सावन के माह मे अमावस्या की तिथि को मे मनाया जाता है। मूलतः यह किसानो का, हरियाली का और खुशहाली का त्योहार है। 


Picture of plant


       छत्तीसगढ मे ज़्यादातर किसान बंधु रहते हैं। जब किसानो की मेहनत दिखाई देने लगती है। खेत हरे हरे धान के पौधों से भर जाते हैं। चारों ओर हरियाली ही हरियाली होती है। तब किसान और उनका परिवार इसकी खुशी मे हरियाली के प्रतीक के रूप मे हरेली का त्योहार मनाते हैं।



हरेली त्यौहार की पूजा 




हरेली के दिन किसान अपने खेती के औजार हल जिसे नांगर भी कहते हैं, फावड़ा, कुदाली और अपने गाए और बैल की  पूजा करते हैं। 

            साथ साथ अपने घर की चौखट मे लोहे की कील लगाते हैं। और नीम की पत्तियां भी लटकाई जाती है। जिसके पीछे यह तर्क है कि घर के सदस्य बीमारियों और बुरी नज़र से सुरक्षित  रहेंगे।



हरेली त्यौहार के पारंपरिक खेल 


         इस दिन बच्चे गेड़ी खेलते हैं। गेड़ी को बांस से बनाया जाता है। इस पर चढ़कर समूह मे गेड़ी नृत्य करते हैं और दौड़ भी लगाते हैं। छोटे छोटे गांव मे सभी मिलकर खेलों का आयोजन भी करते हैं। इनमे महिलाएं फुगड़ी खो-खो जैसे खेल भी खेलती हैं।



हरेली के पारंपरिक पकवान 


        हरेली के दिन के पकवान भी कुछ खास होते हैं। इस दिन घरों मे छत्तीसगढ के पारंपरिक पकवान चीला, रोटी, भजिया, गुलगुला, बड़े, पूड़ी, सलोनी और खस्ता आदि बनाए जाते हैं।


Picture of Sweets, Hindi


       सोचिए सावन का महीना हो रिमझिम पानी गिर रहा हो और आप गरमा गरम इन पकवानो का आनंद ले रहे हों। 


हरेली का त्यौहार और अन्धविश्वास 


वैसे तो हरेली का त्योहार हरियाली और खुशहाली का होता है। परन्तु इसके साथ कुछ मिथक और अंधविश्वास भी जुड़ा हुआ है।

    आज भी छत्तीसगढ के अधिकांश गांवों मे ऐसी मान्यता है कि हरेली की रात अमावस्या मे डायन जंगलों या शमशान मे जाकर अपनी काली विद्या को पोषित करती है। और साल दर साल हरेली की रात अपनी काली विद्या को और ज़्यादा प्रभावशील बनाने के लिए पूर्ण नग्न होकर शमशान या जंगल मे काली क्रियाएं करती हैं।

     छत्तीसगढ के ग्रामीण इलाके मे काला जादू टोना करने वाली औरतों को डायन कहा जाता है।

पर इस मोबाईल फोन और कंप्यूटर युग मे आज के युवाओं के पास ऐसे अंधविश्वास के लिए समय ही कहां है। आज की नई पीढ़ी पढ़ रही है। और नया छत्तीसगढ गढ़ रही है।

साथियों Hindi Me Jano Sab Kuch में  Hareli Festival Of Chhattisgarh पर लिखे गए इस लेख के लिए अपनी राय ज़रूर दीजिएगा।
Hareli Festival Of Chhattisgarh Hareli Festival Of Chhattisgarh Reviewed by Anis ulhaque khan on August 01, 2019 Rating: 5

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